سورة An-Nahl ( The Bees ) - الآية 28

سورة An-Nahl ( The Bees ) - Hindi Muhammad Farooq Khan - الآية 28 عدد الآيات 128

ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلْمَلَٰٓئِكَةُ ظَالِمِىٓ أَنفُسِهِمْ ۖ فَأَلْقَوُا۟ ٱلسَّلَمَ مَا كُنَّا نَعْمَلُ مِن سُوٓءٍۭ ۚ بَلَىٰٓ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٢٨﴾
जिनकी रूहों को फ़रिश्ते इस दशा में ग्रस्त करते है कि वे अपने आप पर अत्याचार कर रहे होते है, तब आज्ञाकारी एवं वशीभूत होकर आ झुकते है कि \"हम तो कोई बुराई नहीं करते थे।\" \"नहीं, बल्कि अल्लाह भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम करते रहे हो
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