Surah At-Taubah ( The Repentance ) - Aya 10

Surah At-Taubah ( The Repentance ) - Hindi - Aya 10 Aya count 129

لَا يَرْقُبُونَ فِى مُؤْمِنٍ إِلًّۭا وَلَا ذِمَّةًۭ ۚ وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُعْتَدُونَ ﴿١٠﴾
ये लोग किसी मोमिन के बारे में न तो रिश्ता नाता ही कर लिहाज़ करते हैं और न क़ौल का क़रार का और (वाक़ई) यही लोग ज्यादती करते हैं
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