Surah At-Taghabun ( Mutual Loss & Gain ) - Aya 10

Surah At-Taghabun ( Mutual Loss & Gain ) - Hindi - Aya 10 Aya count 18

وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَٰتِنَآ أُو۟لَٰٓئِكَ أَصْحَٰبُ ٱلنَّارِ خَٰلِدِينَ فِيهَا ۖ وَبِئْسَ ٱلْمَصِيرُ ﴿١٠﴾
और जो लोग काफ़िर हैं और हमारी आयतों को झुठलाते रहे यही लोग जहन्नुमी हैं कि हमेशा उसी में रहेंगे और वह क्या बुरा ठिकाना है
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