Surah Az-Zumar ( The Groups ) - Aya 56

Surah Az-Zumar ( The Groups ) - Hindi - Aya 56 Aya count 75

أَن تَقُولَ نَفْسٌۭ يَٰحَسْرَتَىٰ عَلَىٰ مَا فَرَّطتُ فِى جَنۢبِ ٱللَّهِ وَإِن كُنتُ لَمِنَ ٱلسَّٰخِرِينَ ﴿٥٦﴾
(कहीं ऐसा न हो कि) (तुममें से) कोई शख्स कहने लगे कि हाए अफ़सोस मेरी इस कोताही पर जो मैने ख़ुदा (की बारगाह) का तक़र्रुब हासिल करने में की और मैं तो बस उन बातों पर हँसता ही रहा
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