Surah Al-Anbiya ( The Prophets ) - Aya 102

Surah Al-Anbiya ( The Prophets ) - Hindi - Aya 102 Aya count 112

لَا يَسْمَعُونَ حَسِيسَهَا ۖ وَهُمْ فِى مَا ٱشْتَهَتْ أَنفُسُهُمْ خَٰلِدُونَ ﴿١٠٢﴾
(यहाँ तक) कि ये लोग उसकी भनक भी न सुनेंगे और ये लोग हमेशा अपनी मनमाँगी मुरादों में (चैन से) रहेंगे
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