पश्न 4: सूरा अल-क़ारिया पढ़ें और उसकी व्याख्या करें?

उत्तर- सूरा अल-क़ारिया और उसकी तफ़सीर:

अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत दयावान्, असीम दयालु है।

वह खड़खड़ा देने वाली। क्या है वह खड़खड़ा देने वाली? और तुम क्या जानो कि वह खड़खड़ा देने वाली (क़यामत) क्या है? जिस दिन लोग, बिखरे पतिंगों के समान (व्याकूल) होंगे। और पर्वत, धुनी हुई ऊन के समान उड़ेंगे। तो जिसका (पुण्य का) पलड़ा भारी होगा। तो वह मनचाहे सुख में होगा। तथा जिसके (पुण्य के) पलड़े हल्के होंगे। उसका ठिकाना हाविया होगा। और तुम क्या जानो वह (हाविया) क्या है? वह दहकती हुई आग है। [सूरा अल-क़ारिया: 1-11]

तफ़सीर (व्याख्या):

1- ''अल्क़ारिअ्तु'', वह क़यामत की घड़ी जो अपनी भयावहता के कारण लोगों के दिलों को झंझोड़ देगी?!

2- ''मल्क़ारिअ्तु'' क्या है वह क़यामत की घड़ी जो अपनी भयावहता के कारण लोगों के दिलों को झंझोड़ देगी?!

3- ''व मा अद्राका मल्क़ारिअ्तु'', और (ऐ रसूल) आपको क्या पता कि वह कौन-सी घड़ी है, जो अपनी भयावहता के कारण लोगों के दिलों को झंझोड़ देगी?! निश्चय ही वह क़यामत का दिन है।

4- ''यौम यकूनुन नासु कल्फ़राशिल मबस़ूस़ि'', अर्थात उस दिन लोगों के दिल इतने भयभीत होंगे कि वे उड़ते हुए पतिंगों की तरह होंगे, कभी यहाँ कभी वहाँ।

5- ''व तकूनुल जिबालु कल इहनिल मनफ़ूश'', पहाड़ चलने एवं हरकत करने में इतने हल्के हो जाएंगे कि मानो धुनी हुई रूई के समान रेज़ा रेज़ा (सूक्ष्म खंड) हों।

6- ''फ़अम्मा मन स़क़ुलत मवाज़ीनुहू'', अर्थात जिनके नेक कार्य बुराई के कार्य की तुलना में अधिक होंगे।

7- ''फ़हुवा फ़ी ईशतिर राज़ियातिन'', अर्थात वह अपने मन मुताबिक सुख में होगा, जन्नत में वह जो चाहेगा, मिलेगा।

8- ''व अम्मा मन ख़फ़्फ़त मवाज़ीनुहू'', और जिसके बुरे कार्य उसके भले कार्य से अधिक होंगे।

9- ''फ़उम्मुहू हावियतुन'', तो क़यामत के दिन उसका आश्रय व ठिकाना जहन्नम होगा।

10- ''व मा अदराका माहियह'', और हे रसूल! तुमको क्या ख़बर कि वह हाविया क्या है?

11- ''नारुन हामियतुन'', अर्थात वह ऐसी आग है जो अत्यधिक धधकी हुई है।